Wednesday, 13 April 2016

रूठी रात है ,रूठे जो तुम हो।
मान जाओगे तो बात बनेगी।
हलचल है मन में कुछ कहोगे तो कुछ निभेगी।
तुम जो हो तन्हा से तो मैं भी तो उदास हूँ,
मुस्कराओगे थोडा सा तो ये हवा भी हँसेगी।
तुमको जो इल्म है मेरे कुछ लफ़्ज़ों का,
बोलोगे खुलके मुझसे तो बात सुलझेगी।
आओ पास मेरे हमदम मुझसे न यु खफा रहो,
बाँहों में बस मेरी ही तुम्हें ज़न्नत मिलेगी।

ज्योति

Sunday, 10 April 2016

न मिलते ये जरुरी न था...उन लम्हों को जीना जरुरी न था।
तुम भी रह लेते मेरे बिना और मैं भी बहुत कोशिश के बाद रह लेती।
लेकिन आज की तरह साथ रहकर तन्हा रोना जरुरी न था...
थोड़ी बेरुखी सह लेते ज़माने की ,पर तुमसे मिलते जरूर हम...
यूँ पास रहकर न मिलना जरुरी न था...
होती शिकायत तो बहुत इस किस्मत से हमको...
पर आज जितनी रूसवाइयां होती...ये जरुरी न था...
हसीं सपने अल्हड उम्र के,मानते कहाँ ये दलीलें हकीकत की...
तब तो दिल को समझना भी उतना जरुरी न था...
चलो यु करते हैं,इक आखिरी वादा भी निभा लेते हैं...
तोड़ देते हैं दिल इक दूसरे का,जो शायद अब जरुरी है,
तब जरुरी न था....

ज्योति...😢
बंद कर लो आँखें की तुम्हे नजर न आती हो अगर मेरी रूसवाइयां
मैं कह भी क्या सकती हूँ तेरी उस मोहोब्बत् को,जिसने कभी मुझे जाना ही नही...
मैं कह भी क्या सकती हूँ तेरी तेरी उस मोहोब्बत् को जिसको एहसास ही नही मेरी छुअन का...
और कहना भी कैसा हो अगर तुम सुनना भी ना चाहो कभी मेरी धड़कनों को...
रोती आँखों  का हर एक मोती बस ये ही पूछता है तुमसे बार बार...
क्या कुछ देर और कर सकती हूँ मैं तेरी मोहोब्बत् पे एतबार...

Jyoti..

Saturday, 9 April 2016

Yu he miloge na hamesha

Yu he miloge na hamesha...mujhse tum mere sapno me...
Ruthna bhi aasan jahan...tumhe manana bhi kitna saral hai...
Teri khamoshiyan bhi khti jahan...mere alfazon ki gazal hai...
Yu he muskraoge na hameaha...tum meri aankon mein...
Fark nhi jahan...waqt aur ijajat ka...mohobbat ko mili mohobbat itna he kafi hai...tujhse milne ki ab bhi ik umeed baki hai...kahoge na tum bhi mujhe...main hu tere apno mein...

Saturday, 6 July 2013

hi all i love to tell n write shayri..wanna join me

tum ho to main hu..
aur yeh bebas tanhayi bhi..
udas na rah mere hamsafar..
zindgi legi angdayi bhi..

aur fasla hai bhi kya..
tere mere beech ka..
ruh to mil he gyi hai ab..
kya hua jo hai jismani ruswayi bhi..