रूठी रात है ,रूठे जो तुम हो।
मान जाओगे तो बात बनेगी।
हलचल है मन में कुछ कहोगे तो कुछ निभेगी।
तुम जो हो तन्हा से तो मैं भी तो उदास हूँ,
मुस्कराओगे थोडा सा तो ये हवा भी हँसेगी।
तुमको जो इल्म है मेरे कुछ लफ़्ज़ों का,
बोलोगे खुलके मुझसे तो बात सुलझेगी।
आओ पास मेरे हमदम मुझसे न यु खफा रहो,
बाँहों में बस मेरी ही तुम्हें ज़न्नत मिलेगी।
ज्योति
मान जाओगे तो बात बनेगी।
हलचल है मन में कुछ कहोगे तो कुछ निभेगी।
तुम जो हो तन्हा से तो मैं भी तो उदास हूँ,
मुस्कराओगे थोडा सा तो ये हवा भी हँसेगी।
तुमको जो इल्म है मेरे कुछ लफ़्ज़ों का,
बोलोगे खुलके मुझसे तो बात सुलझेगी।
आओ पास मेरे हमदम मुझसे न यु खफा रहो,
बाँहों में बस मेरी ही तुम्हें ज़न्नत मिलेगी।
ज्योति
