Sunday, 10 April 2016

बंद कर लो आँखें की तुम्हे नजर न आती हो अगर मेरी रूसवाइयां
मैं कह भी क्या सकती हूँ तेरी उस मोहोब्बत् को,जिसने कभी मुझे जाना ही नही...
मैं कह भी क्या सकती हूँ तेरी तेरी उस मोहोब्बत् को जिसको एहसास ही नही मेरी छुअन का...
और कहना भी कैसा हो अगर तुम सुनना भी ना चाहो कभी मेरी धड़कनों को...
रोती आँखों  का हर एक मोती बस ये ही पूछता है तुमसे बार बार...
क्या कुछ देर और कर सकती हूँ मैं तेरी मोहोब्बत् पे एतबार...

Jyoti..

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